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Sunday, 24 June 2018

भोजन और स्वास्थ्य:


                       खाइए, खिलाइए, पचाइए!
                             स्वास्थ्य बचाइये!!


         बढ़िया-बढ़िया खाना बनाना, खाना और खिलाना किसे नहीं अच्छा लगता! गरमी की छुट्टियों में तो रोज़ कुछ नया खाने का मन करता है। लेकिन इन्हीं दिनों पेट कुछ समस्याएं भी सबसे अधिक घेरती हैं। जिसे देखो वही किसी न किसी पेट की समस्या से ग्रस्त रहता है। गैस की समस्या तो आम है ही, पेट-दर्द, अपच, दस्त आदि की समस्याएं भी किसी न किसी को घेरे रहती हैं। ऐसे में एक गृहणी के लिए पूरे घर के हिसाब से खाना बनाना-खिलाना किसी चुनौती से कम नहीं होता।

       आइए, ऐसी ही चुनौती का सामना करने के कुछ सामान्य और कारगर नुस्ख़ों पर विचार करते हैं:

       (1) घर के प्रत्येक सदस्य को भोजन से ज़्यादा पेय-पदार्थों की ओर आकर्षित करें।
       (2) तरह-तरह की खट्टी-मीठी शिकंजी हर समय तैयार रखें और हर एक को दिन में कम से कम तीन बार अलग-अलग स्वाद की शिकंजी पीने के लिए दें।
       (3) प्रत्येक डाइट में नीबू और प्याज का समावेश अवश्य करें।
       (4) हींग और जीरे की मात्रा बढ़ा दें किन्तु मिर्च की मात्रा कम कर दें।
       (5) अलग-अलग अनाजों के उबले रूप को सलाद और नाश्ते के लिए बदल-बदल कर डाइट का हिस्सा बनाएं।
       (6) खीरा का प्रयोग दोपहर के भोजन के समय ज़्यादा से ज़्यादा करें।
       (7) ठोस आहार की अपेक्षा तरल आहार , दलिया, सब्ज़ीयुक्त खिचड़ी, सेवईं, रायता आदि पर जोर दें।
      (8)  फलों की अपेक्षा सूखे मेवे/ड्राई-फ्रूट्स का उपयोग अधिक करें। कारण, बाज़ार में पुराने, कृत्रिम तरीके से पकाए गए, कीटनाशक-दवाइयों से संरक्षित फल ही इन दिनों अधिक बिकते हैं जिनमें मानकों के प्रयोग का प्रायः अभाव होता है। इसलिए ये फल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होने की जगह नुक़सान पहुंचाने वाले हो सकते हैं।
        (9) बहुत ठंडे पानी और आइसक्रीम से बचने-बचाने की कोशिश करें।
        (10) घूमने जाएं तो खानों की वैराइटी की जगह प्राकृतिक-धार्मिक-सांस्कृतिक-ऐतिहासिक वातावरण का आनंद अधिक लें।

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2 comments:

  1. चित्र तो लेख से ज़्यादा मेल नहीं खाता।

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  2. वैसे विचार अनुकरणीय हैं!...

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