जीवन का फ़साना
भोजन और भजन
दो ऐसे शब्द हैं
जो अवध के जीवन में
गुड़-मिठाई की तरह
रचे बसे हैं!
दोनों
यहाँ की
संस्कृति-सभ्यता से
ऐसे जुड़े हैं
जैसे
शरीर के साथ
आत्मा!...
यहां के गाँवों-कस्बों में
आप महसूस कर सकते कि
यहां के जन-साधारण का
जीवन-दर्शन है:-
'कम खाना, गम खाना,
राम-राम करना
ऊपर वाले का
शुक्र मनाना!
यही है
जीवन का फ़साना,
चार दिन का आना
चार दिन का जाना...
जब तक है
ये जीवन
दोनों चलेंगे,
युगों-युगों तक
साथ ये रहेंगे!...💐💐💐